Thursday, 21 May 2026

अहमद बुहारी–कोस्टल एनर्जेन (CEPL) मामला: पूरी टाइमलाइन और फैक्ट चेक

 

अहमद बुहारी–कोस्टल एनर्जेन (CEPL) मामला: पूरी टाइमलाइन और फैक्ट चेक

यह मामला मुख्य रूप से कथित घटिया कोयले की सप्लाई, ओवर-इनवॉइसिंग, CBI जांच, ED की PMLA कार्रवाई, और बाद में दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency Resolution) से जुड़ा है।


1. मामला कैसे शुरू हुआ?

2018: DRI और CBI जांच

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने आरोप लगाया कि
Coastal Energen Private Limited
और उससे जुड़ी कंपनियों ने इंडोनेशिया से आयातित कोयले की गुणवत्ता और कीमत में हेरफेर किया।

आरोप था कि:

  • कम गुणवत्ता वाले कोयले को उच्च गुणवत्ता वाला दिखाया गया
  • NTPC जैसी सार्वजनिक कंपनियों को ऊंचे दाम पर सप्लाई किया गया
  • फर्जी सर्टिफिकेट और ओवर-इनवॉइसिंग का इस्तेमाल हुआ

इसके बाद CBI ने FIR दर्ज की।




2. ED की एंट्री और PMLA केस

CBI FIR के आधार पर
Enforcement Directorate
ने PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत ECIR दर्ज की।

ED ने दावा किया कि:

  • लगभग ₹564 करोड़ की “proceeds of crime” बनी
  • यह पैसा विभिन्न विदेशी कंपनियों और पावर प्रोजेक्ट में लगाया गया

ED ने CEPL की संपत्तियां अटैच भी कीं।


3. अहमद बुहारी की गिरफ्तारी

मार्च 2022 में
Ahmed A.R. Buhari
को ED ने गिरफ्तार किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • उन्हें लगभग 31–32 महीने जेल में रहना पड़ा
  • कई बार जमानत याचिकाएं खारिज हुईं
  • बाद में 2024 में उन्हें बेल मिली

4. कंपनी दिवालिया (Insolvency) में कैसे गई?

कानूनी कार्रवाई, फंडिंग संकट और प्रबंधन समस्याओं के बीच
Coastal Energen Private Limited
दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) में चली गई।

इसके बाद:

  • NCLT ने समाधान प्रक्रिया शुरू की
  • बाद में
    Adani Power
    और DAIT consortium ने कंपनी अधिग्रहित कर ली

यह अधिग्रहण लगभग ₹3,300 करोड़ के समाधान प्लान के तहत हुआ।


5. दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

सितंबर 2025 में
Delhi High Court
ने CBI की मूल FIR को रद्द (quash) कर दिया।

कोर्ट के आदेश के बाद:

  • “predicate offence” (मूल अपराध) ही खत्म हो गया
  • इसलिए PMLA केस का आधार कमजोर पड़ गया

6. मई 2026: PMLA कार्यवाही समाप्त

चेन्नई की विशेष अदालत ने कहा कि:

  • जब मूल CBI FIR ही रद्द हो चुकी है
  • तो ED का PMLA मामला भी जारी नहीं रह सकता

इसके बाद सभी मनी लॉन्ड्रिंग कार्यवाही खत्म कर दी गई।


फैक्ट चेक: क्या दावे सही हैं?

दावास्थितितथ्य
DRI ने घटिया कोयले की सप्लाई का आरोप लगाया✅ सहीकई रिपोर्ट्स और कोर्ट दस्तावेजों में उल्लेख
CBI ने FIR दर्ज की✅ सहीदिल्ली HC आदेश में संदर्भ
ED ने PMLA केस बनाया✅ सहीECIR और कोर्ट रिकॉर्ड उपलब्ध
अहमद बुहारी मार्च 2022 में गिरफ्तार हुए✅ सहीमीडिया और कोर्ट रिपोर्ट्स
उन्होंने 31–32 महीने जेल में बिताए✅ लगभग सहीअलग-अलग रिपोर्ट्स में 31 या 32 महीने
Adani Power consortium ने CEPL अधिग्रहित किया✅ सहीInsolvency प्रक्रिया में अनुमोदन मिला
दिल्ली HC ने FIR quash की✅ सही16 सितंबर 2025 आदेश
मई 2026 में PMLA केस खत्म हुआ✅ सहीचेन्नई विशेष अदालत का आदेश

महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु

इस केस में सबसे अहम सिद्धांत यह रहा:

यदि “predicate offence” (मूल अपराध) ही खत्म हो जाए,
तो PMLA केस भी टिक नहीं सकता।

विशेष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के
Vijay Madanlal Choudhary judgment
सिद्धांत का हवाला दिया।


निष्कर्ष

यह मामला भारत में:

  • PMLA की शक्तियों,
  • लंबी हिरासत,
  • कॉर्पोरेट दिवालिया प्रक्रिया,
  • और जांच एजेंसियों की कार्रवाई

को लेकर बड़ा उदाहरण बन गया है।

हालांकि:

  • अदालतों ने अंततः केस रद्द कर दिया,
  • लेकिन इस दौरान कंपनी का नियंत्रण बदल गया और मूल प्रमोटर को लंबी जेल काटनी पड़ी।

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